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सोमवार, 30 नवंबर 2009

संदेश मेरे लिए देखें आप सभी

- श्री भगवान को प्रेम से जगाओ आपका भाग्य जागेगा।


- श्री भगवान को स्नान कराओ तो आपके सब पाप धुल जाएँगे।

- श्री भगवान को चरणामृत प्रेम से पान कराओ आपकी मनोवृत्ति बदल जाएगी।



- श्री भगवान को तिलक लगाओ आपको सर्वत्र सम्मान मिलेगा।

- श्री भगवान के चरणों का तिलक स्वयं भी लगाओ आपका मन शां‍त होगा।

- श्री भगवान को भोग लगाओ आपको संसार के सभी भोग मिलेंगे।



- श्री भगवान का प्रसाद स्वयं भी पाओ, आप निष्‍पाप हो जाओगे।

- श्री भगवान के सम्मुख दीप जलाओ आपका जीवन प्रकाशवान होगा।

- श्री भगवान को धूप लगाओ आपके दुख के बादल स्वत: छट जाएँगे।



- श्री भगवान को पुष्प अर्पित करो आपके जीवन की बगिया महकेगी।

- श्री भगवान का भजन-पाठ करो आपका यश बढ़ेगा।

- श्री भगवान को प्रणाम करो संसार आपके आगे झुकेगा।



- श्री भगवान के आगे घंटनाद करो आपकी दुष्प्रवृत्तियाँ दूर होंगी।

- श्री भगवान के आगे शंखनाद करो आपकी काया निरोगी रहेगी।

- श्री भगवान को प्रेम से शयन कराओ आपको चैन की नींद आएगी।



- श्री भगवान के दर्शन करने नित्य मंदिर जाओ आपके दुख में प्रभु दौड़े चले आएँगे।

- श्री भगवान को अर्पण कर ही वस्तु का उपभोग करो आपको परमानंद मिलेगा।

- श्री भगवान को लाड़-प्यार से खिलाओ संसार आप पर रिझेगा।



- श्री भगवान से ही माँगो जो चाहोगे वो आपको मिलेगा। (अन्य से नहीं)

- श्री भगवान का प्रसाद मान सुख-दुख भोगो आप सदा सुखी रहेंगे।

- श्री भगवान का ध्यान करो प्रभु अंत समय तक आपका ध्यान रखेंगे।

सौजन्य से - श्री रामभक्त हनुमान मंदिर

अधुरा मन्दिर



क्या आपने ऐसा कोई प्राचीन अधूरा मंदिर देखा है जिसकी छत न हो और जिसमें किसी देवता की मूर्ति भी स्थापित न की गई हो। यदि नहीं तो आओ चलते हैं एक ऐसे ही मंदिर में।




इस मंदिर के बारे में कई तरह की किंवदंतियाँ है। जिनमें से दो किंवदंतियाँ ज्यादा प्रचलित है। इस मंदिर की दास्तान जुड़ी हुई है नेमावर के सिद्धनाथ मंदिर से। एक बार की बात है नेमावर के सिद्धेश्वर क्षेत्र में कौरव और पांडवों का रुकना हुआ।



एक शाम कुंती ने देखा की कौरवों ने इस क्षेत्र में एक भव्य मंदिर बनाया है तब उन्होंने पांडवों से कहा कि तुम भी इसी तरह का एक भव्य मंदिर बनाओ जिससे कौरवों के समक्ष हमारी प्रतिष्ठा बनी रहे और तुम्हारे पास इसे बनाने के लिए सिर्फ एक रात ही बची है।



उसी शाम कौरवों ने पांडवों से कहा की हमने इस क्षेत्र में एक मंदिर बनाया है। पांडवों ने कहा कि हमने भी इस क्षेत्र में एक मंदिर बनाया है। कौरवों ने कहा कि हमने तो आपको बनाते हुए देखा नहीं और यदि बनाया भी है तो हम पहले ही बता दे कि हमारा मंदिर पूर्वमुखी है और आपका?





NDपांडवों ने कहा कि हमारा पश्चिममुखी मंदिर है। इस पर कौरवों ने कहा कि ठीक है। तब तो हम कल सवेरे आपका मंदिर देखने चलेंगे।



पांडवों को अब यह चिंता सताने लगी कि आखिर रात भर में मंदिर कैसे बन पाएगा जबकि हमने कौरवों से झूठ कहा था कि हमने भी मंदिर बनाया है। ऐसे में भीम ने कहा कि आप चिंता न करें। भीम ने कुंती को वचन दिया की मैं रात भर में आपके कहे अनुसार मंदिर बना दूँगा।



रात्रि में भीम ने कौरवों के बनाए मंदिर के पास स्थित पहाड़ी पर मंदिर बनाने का कार्य आरंभ किया। लेकिन अर्ध रात्रि से ऊपर बीत जाने पर भी वह मंदिर नहीं बना पाए, तब उक्त मंदिर को अधूरा ही छोड़कर भीम ने जहाँ कौरवों ने मंदिर बनाया था उस उक्त पूर्वाभिमुखी मंदिर को घुमाते हुए पश्चिममुखी कर दिया।



दूसरी कहानी इस तरह की है कि कुंती ने भीम से कहा कि मेरे लिए एक रात में एक मंदिर बनाओ। यदि एक ही रात में नहीं बनता है तो हम यह स्थान छोड़ देंगे। भीम के लाख प्रयास के बाद भी जब मंदिर पर छत लगाने का काम शुरू किया तब भौर हो चुकी थी ऐसे में भीम ने मंदिर को बनाना छोड़ दिया। वचनानुसार ‍पांडवों ने कुंतीसहित उक्त स्थान को छोड़ दिया।

शनिवार, 28 नवंबर 2009

gita ki booli: श्री श्री श्रीमद -भागवत -गीता

gita ki booli: श्री श्री श्रीमद -भागवत -गीता

ajb teri maya



jagrn ,अजूबा बना जिराफ, कर रहा योगवाशिंगटन, एजेंसी : सीधी और लंबी गर्दन जिराफ की खासियत है। अपनी लंबी गर्दन के कारण ही जिराफ का खाना-पीना हो पाता है। पर ओहियो के टुलसा चिडि़याघर में पल रहा एक जिराफ इन दिनों दर्शकों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। एमली नाम की इस मादा जिराफ की गर्दन सीधी न होकर हुक की तरह मुड़ी हुई है। इसके बावजूद वह आराम से खाना खा लेती है। ऐसे में वह आम लोगों के लिए अजूबा बनी हुई है। चिडि़याघर के कर्मचारियों का कहना है कि गर्दन मुड़ी होने के बावजूद 11 फुट लंबी एमली सामान्य है। हालांकि डाक्टर उसकी गर्दन सीधी करने की कोशिश भी कर रहे हैं। यहां तक कि उसे योग का अभ्यास भी कराया जा रहा है। जिराफ की गर्दन की हड्डियां काफी मजबूत और सीधी होती हैं। इस कारण ये ऊंचे पेड़ों से अपना भोजन लेने में सक्षम होते हैं। लेकिन पांच साल की एमली के मामले में ऐसा नहीं है। इसलिए वह डाक्टरों के लिए भी शोध का विषय बनी हुई है। डाक्टर यह पता लगा रहे हैं कि एमली में इस विकृति का क्या कारण है। वे यह भी शोध कर रहे हैं कि विकृति के बावजूद एमली आम जिराफ की तरह ही कैसे खा-पी लेती है। एमली का उपचार कर रहे डा. बैकस ने कहा कि गर्दन में खिंचाव आने पर मनुष्य योग का सहारा लेते हैं। उसी तरह एमली की गर्दन सीधी करने के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है। उसे दर्द निवारक दवाएं भी दी जा रही हैं। चिडि़याघर के निदेशक ने कहा कि एमली का अर्थ होता है होप यानी उम्मीद। हमें भी उसकी गर्दन ठीक हो जाने की उम्मीद है।