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शनिवार, 18 सितंबर 2010
बुधवार, 17 मार्च 2010
कृष्ण की आज्ञा
गिरिजेश राव जी ने प्रश्न किया हे की मेने अडल्ट टेग क्यों दिया हे?// इस का उतर ---मेरी तो इछा नही थी परन्तु bhgwan कृष्ण की आज्ञा के विपरीत जाने की हिमत गीता नही कर सकी भगवान ने कहा हे ,तुझे यह गीता रूप रहस्य -म्ये उपदेश किसी भी काल में तप - रहित भगती - रहित और न सुनने की इछा वालों खास कर unse जो मुझ में दोष दृष्टि रख ते हें ऐसे मनुषों से तो कभी नही कहना
सोमवार, 22 फ़रवरी 2010
मुर्खता पूर्ण ब्यान
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लताजी ने यूँ तो भक्ति संगीत के कई गीत गाए हैं और श्रीराम स्तुति को उनसे बेहतर आज तक कोई भी बेहतर ढंग से पेश नहीं कर पाया है। हनुमान चालीसा की उनकी यह नई पेशकश निश्चित रूप से 'बजरंग भक्तों' के लिए एक नई सौगात साबित होगी।
लता ने कहा कि इस समय हमारा देश बेहद कठिन समय से गुजर रहा है और हनुमानजी संकटमोचन के नाम से जाने जाते हैं। लताजी ने कहा कि मैंने अपने 60 साल के करियर में हनुमानजी की प्रशंसा में कोई गीत नहीं गाया, लेकिन अब मैं हनुमान चालीसा को आवाज दे रही हूँ। उनका आशीर्वाद लेने का यह सही समय है।
लता मंगेशकर को इस वक्त मुंबईClick here to see more news from this city स्थित अपने घर के नीचे धूमधाम से गणेशोत्सव मनाते देखा जा सकता है। यह भी खबर है कि उन्होंने अपनी आवाज में हनुमान चालीसा के पाठ की जो रिकॉर्डिंग की थी, वह कैसेट की शक्ल ले चुकी है।
आम धारणा है कि हनुमानजी ब्रह्मचारी रहे, लिहाजा महिलाएँ न तो हनुमान चालीसा का पाठ करती हैं और न ही उनके मंदिरों में शीश झुकाने जाती हैं, लेकिन बदलते वक्त ने इस धारणा को भी तोड़ दिया। आज हनुमान मंदिरों में बच्चों, पुरुषों के साथ-साथ युवतियाँ और महिलाएँ भी अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए बड़ी संख्या में पहुँचती हैं।
विश्व प्रसिद्ध संत मुरारी बापू भी अपनी रामकथा के प्रवचनों में साफ तौर पर कहते हैं कि हनुमाजी की आराधना करना महिलाओं के लिए वर्जित नहीं है।
मुर्खता पूर्ण ब्यान
बाल ब्रह्मचारी हनुमान के द्वार पर नारी का क्या काम
बापू इतने स्वार्थी ना बनो
दिल नही मानता तो
तुम भी नारी संग नाच लो मंगलवार, 28 जुलाई 2009
झूठ की सच से दोस्ती
झूठ और सच दोनों लगे खाने ,एक ही थाली में । वक्त का चक्का लडखडा गया इन दोनों की प्याली में । समय -असमय भी इकठे हो लिए । सत्य-असत्य की राह में । । ज्ञान यह सब देख घबरा गया । बदल सा गया ख़ुद अपने आपमें । कितने दोष लगे आने नजर अपने ही यारों में । अपने आप में झांक कर तो देखो माजरा ख़ुद समझ में आजे गा क्यों दिल बंट गया घरवाली और बाहरवाली में । स्वार्थ पने को त्यागने में आप भी अपना -अपना हिसा डालदो,मानव समाज के हित में । तुम पर दुनिया नाज करे गी अगर भरते हो तुम यह शक्ति अपने माली में ............................................................................................................................. ॥ । ............................अज्ञानता ....................................................................................... ॥ --------------------------------------------------------------------------------------------- अज्ञानता के सागर में लगा गोता धर्म गुरु जेहाद हे बोलता ... ॥ । .जिसे वो जेहाद बताता हे उस में दहशत गर्दी नंगा नाच -नाचती हे ॥ ॥ सारा जमाना यह जान चुका हे पुरी तरह पहिचान चुका हे ॥ ॥ । फिर क्यों ख़ुद को धोखा दे रहे हो हजारों सबूतों को क्यों ठुकरा रहे हो ॥ ॥ क्या तुम कहीं शेतान बन दुनिया को ख़ुद में खुदा तो नही बता रहे हो ?॥ ॥ क्या तुम कहीं भूल तो नही गये की इंसानों का एक ही खुदा होता हे ॥ ॥ जिस का महबूब तुम्हारे जेहाद से मरने वाला भी होता हे
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