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सोमवार, 25 मई 2009

संजय -बोले दुर्योधन ने व्यूह -रचना युक्त पांडवों की सेना को देख तथा गुरु द्रोणाचार्य के पास जा कर कहा |h आचार्य आपके बुधिमन शिष्य द्रुपद -पुत्र ध्रिष्ट्धुमन द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डु-पुत्रों की इस बडी भरी सेना को देखिये। । यहाँ

शनिवार, 23 मई 2009

धृत राष्ट्र बोले -हे संजय धर्म भूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित ,युद्घ की इछावाले मेरे और पांडु के पुत्रों ने क्या किया /////////////////////// ///////////////////////////////// यहाँ कुछ बातें पता चलतीं हे जेसे धर्म की भूमि अर्थात धर्म का छेत्र धर्म का छेत्र अत्यंत विशाल होता हे (पति-पत्नी का भाई -बहन का पिता-पुत्र का माँ-बेटे का भाई-भाई का गुरु -शिष्य का पडोसी का मित्र का भइया-भाबी का जीजा -साली का सास-ससुर का )अनेकों प्रकार के धर्मो को हम पवित्र पुस्तकों में अलग-अलग रूपों में पाते हे /शास्त्रों में स्वभावों तक के धर्मों का उलेख मिलता हे यहाँ तो अर्थात कुरुक्षेत्र में हर धर्म ही गड़-बड़ हो चुका हे तभी तो भगवान को अवतार ले कर धर्म की स्थापना करनी पडी जिस के लिए महा -भारत के युद्घ में अपने -अपने धर्म को छोड़ चुके कोरव-पांडु पुत्र युद्घ की इछा कर लड़ने -मरने को तयार हे इन दोनों धडों ने क्या किया हे संजय बताते हे

गीता की भी सुनलो

गीता भारत में ऐसी पवित्र धर्म पुस्तक हे जिस को कुछ विद्वानों ने अज्ञानता और निजी स्वार्थ को सामने रख कर काले अक्छरों में लिख दिया हे ,दुसरे विद्वानों ने इसे पड़ कर अन पड़ा कर दिया वास्तव में गीता ज्ञान का भंडार हे ,जितनी बार पड़ो नया ही भाव उत्पन होने लगता हे मेने जेसा इस के भावों को समझा या जाना यहाँ वेसा ही लिख दिया हे ,आप भी इस गीता शास्त्र का आनंद उठावें .................................................