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शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2009

भुत


प्रेत जिन पिशाच का सनातन धर्म से सम्बन्ध?
सनातन धर्म में भूतों का विशेष महत्व हे |गीता शास्त्र में भगवान क्ह्तेहे की बहुत प्रेत पिशाच जिन की हम बुरी या भली आत्मा के रूप में कल्पना करते हें ओर समाज में इन का
वर्चस्व भी देखा करते हें |वास्तव में वही आत्मा परमात्मा होती हे |परमात्मा का कहना हे की तुम मेरी ओर एक कदम चलो में तुम्हारी ओर चार कदम बडूगा |जब हम उस परमात्मा का चिन्तन खुदा यशु अकाल्पुर्ख या भूत प्रेत जिन पिशाच आदि के रूप में करते हैं तब परमात्मा उसी रूप में चार कदम हमारी ओर बड़ता हे , भगवान कृष्ण ने मिटटी खा कर माता के कहने पर अपना मुह खोल कर दिखाया तब माता को उन के मुह में बह्मांड नजर आया था |माता उन को पहिचान नही सकीं और उन पर किसी बला का साया समझ बैठीं |यदि यह उन को ब्रह्मांड का स्वामी मान लेतीं तो उन को तभी पता चल जाता की कृष्ण उन का पुत्र नही भगवान हेँ |इस के बाद श्री कृष्ण की लीलाएं किसी भूत प्रेत से कम नही थीं |हमारे शस्त्रों ने तो यहाँ तक कहा हे कि जेसा स्वरूप हम अपने मष्तिष्क में बनाते हेँ भगवान उसी रूप के हो जाते हैं |सागर का जल सागर नदी का जल नदी गिलास कटोरी का जल वैसा ही रूप धारण कर लेता हे भगवान भी जिस रूप में खोजे जाते है उसी रूप के होकर वैसे ही कर्म करने लगते हैं |अर्जुन भी भगवान का विराट रूप देख कर भयभीत हो उनसे शांत स्वरूप में दर्शन देने का आग्रह करते हैं |अतः प्रमाणित होता हे कि सदा शांत स्वरूप ही पूजने के योग्य होता हे |क्रोधित स्वरूपों की कल्पना मात्र क्रोध उत्पन कर उत्पात उत्पन करती हें |क्या यह खोज का वेज्ञानिक विषय नही हो सकता ?या ओझा तांत्रिकों का विषय अथवा दिमाग के डाक्टरों की कमाई का विषय मात्र इस लिए हो गया की सनातन धर्म को हम भूल गये हैं ?सनातन के मूल सिधान्तों का अनुसरण न करने से भूत प्रेत जिन के चक्र में दुखी होना स्वभाविक ही है |यदि हम देवता ही मान कर चलें तो भी देवता लोग किसी को नुक्सान नहीं पहुंचाते
    (सनातन धर्म बेशक पुराना है पर प्रयोग नया है )

मंगलवार, 6 अक्तूबर 2009

सनातन की नरमाई चारों धर्मो में कमी लाइ

 हर इन्सान की रक्षक गीता ,
                                                     आज कल होड़ लगी हुई हे की किस का धर्म बडा हे कोनसा धर्म सचा हे मेरा तेरा या उसका ?
                    गीता शास्त्र ने तो साफ़-साफ़ कहा हे की यदि तुझे लगे कि दुसरे का धर्म तुझ से अछा हे तो भी अपने जन्म वाले धर्म को कभी भी ना त्यागना ,अपने स्वधर्म को ना त्यागना उसी स्वधर्म के कर्म को करता जा तू मोक्ष को प्राप्त हो जाए गा |
                              प्रभु कि इस आज्ञा के बाद छोटे-बडे का प्रश्न ही नही उठता ,फिरभी सनातन धर्म के चारों अंग हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई अपने-अपने धर्म को बडा चड़ा कर एक दुसरे का अपमान करने पर तुले हुए हैं |
                       हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई आपसमे भाई-भाई क्यों कि यह चारों ही सनातन धर्म के अंग हें |इन चारों धर्मों को निर्देश देने वाला एक वही सनातन पुरुष परमात्मा ही हे |ऐसा इस लिए भी कह सकते हें कि इन चारों धर्मों को उस परमात्मा ने एक जेसी ही आज्ञा दे रखी ही |जिसमे प्रमुख आगया तो यही हे कि मुझे अर्थात ईश्वर के अतिरिक्त और किसी को सताधारी मत माना |
सदा मुझमे ध्यान लगाना ,निदा चोरी -चकारी ,व्यभिचारी , अपराध(पाप कर्म)से बचना पडोसी से बना कर रखना ,ध्यान रखना तेरे आस-पास रहने वाला कोई भूखा ना रह जाए दुखिये कि यथा योग्य मदद करना
                        हाँ कभी कोई भेष ऐसा मत बनाना कि तेरी पहिचान हो कि तू अमुक समुदाय से हे एक दम सरल सादा भेष हो तेरा कोई विशेष भेष धारण करने कि कोई जरूरत नही |
             आज चारों धर्म चाहे हिन्दू हो या मुसलमान सिख हो या इसाई उस ईश्वर कि इन आज्ञाओं का पालन करने में हीच-किचाता हे |जो इन या ऐसी ही और प्रभु आज्ञाओं का पालन करताहे वही फकीर कहलाता है |फकीर इन चारों धर्मों में आज भी पाया जाता हे |
                       फकीर ही परमात्मा कि आँख का तारा होता है |बाकी मुझे तो कोई भी धर्म जिस का पतन ना हो रहा हो नजर नही आरहा |आइये अब लोट चलें अपने उसी पुराने सनातन धर्म कि ओर उसके बनाये नियमों कि ओर अभी भी वक्त हे सुबहा के भूले को भुला नही कहते |
सनातन पुरुष का गुण-गान हो अपने अपने धर्मानुसार परमात्मा की पूजा हो घंटी घडियाल बजाने नमाज पड़ने गुरबानी पड़ने ओर प्रार्थनाओं का असर तभी दिखाई देगा जब सनातन धर्म में रहते हुए सनातन नियमों का पालन होगा
\             नही तो विचार करलो चारों धर्मों ने विश्व शान्ति के लिए पाठ पूजा की परन्तु हर प्रयास असफल रहा |सनातन वृक्ष की जड़ को सींचने की जरूरत हे आज सनातन वृक्ष पुन्हा हरा-भरा हो जाए गा |प्रयास तो कर के देखो |

उधेड़-बुन: करवा चौथ


अंधे की आँख गीता ,
                बदलते जमाने ने बदल दिए
                             दिन त्यौहार
                  विरोध करने वाला खाता मार

करवा चोथ का व्रत

मनकी शान्ति गीता ,
                                   करवा चोथ की सभी को बिधाई बहुत ही कठिन व्रत होता हे अन जल कुछ भी ना ग्रहण कर सुहागिने पीटीआई की लम्बी आयु की कामना करतीं हैं |बेचारे पति देव का हाल तो देखो पत्नी पानी तक नही पीती पर व्रत के नाम पर पति देव के हजारों खर्च हो जाते हें |
                             एक पत्नी ने करवा चोथ का व्रत रखा रातको व्रत खोलना था पति से पत्नी ने कहा  रातको खाने के लिए कुछ मिठाइयां और केले लेते आना पत्नी व्रता बाजार से सारा सामान ले आया रात को चाँद निकला ,व्रत तोड़ने की तयारी हुई |पत्नी ने डट कर सारे दिन की भूख मिटाई |
         थोडी देर के बाद पत्नी के पेट  में जोरों की दर्द होनी शुरू हो गयी पति परेशान सारे घरेलू उपचार कर लिए दर्द नही रुका पति पडोसी के घर से पेट दर्द की टिकिया ले आया |पानी गर्म कर पत्नी से बोला लो यह टिकिया खालो पेट दर्द रुक जावे गा |
           पत्नी ने पति को डांट लगाते हुए कहा अगर पेट में टिकिया की जगहा बची होती तो क्या में एक केला और ना खा लेती
                               

शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2009

aaj se

orkut pr aaj se yh blog dekh skte hen